पेड़ों की छटाई के नाम पर कत्लेआम

#पत्रकार शंकर विश्वकर्मा

शहर में इन दिनों सड़कों के किनारे लगे पेड़-पौधों की छटाई का काम किया जा रहा है। यह इसलिए किया जा रहा है ताकि उनकी साखाएं उपर से गुजरी बिजली के तारों से न टकराएं। अगर वे तारों से टकराते हैं तो दुर्घटना हो सकती है। इतना ही नहीं किसी की जान भी जा सकती है। इसलिए इनको समय-समय पर बिजली विभाग व नगर निगम के उद्यान विभाग के द्वारा उपर से छाटने का काम कराया जाता है। परंतु अधिकारियों के द्वारा इसकी मॉनिटरिंग न किये जाने से छटाई कार्य में लगे ठेकेदार व कर्मचारी चंद पैसों की लालच में पेड़ाें का कत्लेआम कर रहे हैं।

—-एक ओर पौधा रोपने के लिए देश भर में मुहिम चलाई जा रही

इन दिनों देश भर में पौधा रोपने के लिए मुहिम चलाई जा रही है। ताकि पौधे बड़े होकर शुद्ध ऑक्सीजन देने के साथ ही वायु प्रदूषण को भी कम कर सकें। इस कार्य में जनप्रतिनिधी, अधिकारी, कर्मचारी एवं समाजिक संघठन आदि से जुड़े लोग सामिल हैं। कई संगठन तो प्रतिदिन पौधा लगाने का कार्य कर रहे हैं। ताकि शहर, प्रदेश और देश में बढ़ते वायु प्रदूषण को रोका जा सके और लोगों को शुद्ध आक्सीजन प्राप्त हो। इसके लिए जनता की खून पसीने की कमाई को पानी की तरह बहाया जा रहा है।

—-सड़कों के किनारे लेगे पेड़ों का अस्तितव खतरे

सड़कों के किनारे लेगे पेड़ों का अस्तितव खतरे में बना हुआ है। इनको कभी सड़क चौड़ी करण तो कभी शहर विकास के नाम पर तो कभी किसी की दुकान या घर इनसे ढंक रहा होता है तो उसके लिए इनका कत्लेआम कर दिया जाता है। सोचने वाली बात है कि शहर विकास के नाम पर या किसी को उपकिृत करने के लिए इनको इसी तरह कटते रहे तो निरंतर कम हो रहे ऑक्सीजन लेवल और बढ़ते वायु प्रदूषण से कैसे निजात मिलेगी?

—बिजली के तारों से ना टकराए इसलिए छटाई की जा रही

शहर में इन दिनों बिजली के तारों के नीचे लगे पेड़ों की छटाई का काम किया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि इनको इसलिए छांटा जा रहा है, ताकि ये बिजली के तारों के संपर्क में न आ सके। क्याेकि अगर ये बिजली के तारों के संपर्क में आए तो इन में करंट आ सकता है और अगर ऐसा हुआ तो कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है। इसलिए इनको समय रहते छांटा जा रहा है। ताकि कोई दुर्घटना न हो सके।

—पैसाें की लालच में हरेभरे पेड़ों का कत्लेआम

जिम्मेदारों का कहना है कि बिजली के तारों के संपर्क में पेड़ न आए इसके लिए उनके तनों की कटाई की जा रही है। उनकी यह बात ठीक भी है कि पेड़ बिजली के तार के संपर्क आ जाता है तो पेड़ में करंट फैल सकता है, जिससे जन हानी हो सकती है। परंतु छटाई के नाम पर आधे से अधिक या जड़ से काटना कहां तक उचित है। लोग तो यह तक कह रहे हैं कि कहीं जिम्मेदार ही तो पैसों या किसी को उपकृत करने के लिए इन हरे भरे पेड़ों का कत्लेआम तो नहीं करा रहे हैं। अगर ऐसा नहीं है तो ये कार्रवाई क्यों नहीं करते हैं। इनकी चुप्पी से साफ जाहिर होता है कि कहीं न कहीं इनकी भी सहभागिता है, तभी तो ये खामोस हैं।

—- शहर में कई जगहों पेड़ों की छटाई के नाम पर उनका कत्लेआम किया जा रहा

शहर में अने जगहों पर पेड़ों को छटाई के नाम पर कत्लेआम किया जा रहा है। ऐसा ही कुछ विजय नगर, दीन दयाल चौक, आईटीआई रोड व दमोह नाका, संजीवनी नगर, अधारताल आदि में देखने मिला। दीन दयाल चौक से आईटीआई रोड पर मुख्य रोड और लिंक रोड के बीचों बीच सैंकडों की संख्या में हरे भरे पेड़ लगे हुए हैं। ये पेड़ ऐसे ही नहीं हो गये हैं इसमें लोगों की कई सालों की कड़ी महनत और रात दिन की देख-रेख के बाद हुए हैं। परंतु लिंक रोड पर बनी दुकानों के संचालकों को ये फूटी आंख नहीं सुहा रहे हैं। इसका मुख्य कारण है कि उनकी दुकानें मुख्य रोड पर जा रहे राहगीरों को इन पेड़ों की वजह से स्पष्ट रूप दिखाई नहीं देती हैं। इसके चलते उनका व्यापार प्रभावित हो रहा है। वहीं आईटीआई के पास भी इसी तरह का मामला सामने आया। विजय नगर फुटपाथ पर लगे पेड़ भी इसी का शिकार हो रहे हैं। यही वजह है कि प्रभावित लोग पेडों की छटाई करने आये कर्मचारियों से सांठ-गांठ करके इनको डूंठ में तब्दील करा रहे हैं, ताकि आगे चलकर वे सूख जाएं और उनकी दुकानें दूर से लोगों को दिखाई देने लगे।

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